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Showing posts from April, 2026

बहना मेरी तू सबसे प्यारी

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‎बहना मेरी तू सबसे प्यारी, मेरी लाड दुलारी है, ‎फूलों में, खुशियों में झूमे ऐसी तमन्ना हमारी है। ‎तू हैं घर की लाड दुलारी, खुशियों की फुलवारी है, ‎पूरा घर हैं तुझसे रोशन, तू घर की शान हमारी है।  ‎ ‎भाई बहन के प्यार में,लड़ना झगड़ना आम बात है, ‎देखों मम्मी भाई ने मुझे मारा,यह तो हर घर की बात है।  ‎बहना तुझसे लड़ने का,एक अलग ही मजा आता हैं ‎जब मैं तुझसे रुठ जाता हूं, तो मनाना भी तुझको आता है। ‎ ‎मैं भाई तेरा प्यारा, तू बहना एक हमारी है, ‎मुझसे बहुत प्यार हैं करती,  ‎ममता की झलक एक प्यारी है।  ‎ ‎देखो बहन मुझे छोड़कर, दूर कभी तुम मत जाना, ‎रो पड़ूँगा तुम्हारे बिना, क्योंकि दूर रहना रहना मुझे नहीं आता।  ‎ ‎चलो आज एक वादा करते,  एक दूसरे से नहीं लड़ेंगे हम, ‎प्यार से रहेंगे हम, खूब मस्ती करेंगे हम...। ‎ ‎Dedicate to all dear loving Sisters ‎       ‎- रोहित प्रभाकर      @rohitvprabhakar

‎माँ का आँचल ❣️

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  ‎माँ का आँचल ❣️ ‎ आई, अम्मा, माँ बोले  या  बोले  अम्मी,  ‎बच्चों के लिए प्यारी होती हैं उनकी मम्मी। ‎ ‎जब माँ नहीं दिखती तो दिल बेचैन हो जाता है,  ‎माँ उधर होगी यह सोचकर सारा घर ढूंढ आता है। ‎ ‎लेकिन माँ के मिलते हैं दिल में सुकून सा आ जाता है, ‎यू  समझो  वह  सारी  दुनिया  पा  जाता है। ‎ ‎माँ के हाथों से खिलाए निवालों में जो स्वाद आता है, ‎शायद ही वह किसी छप्पन भोग में मिले। ‎ ‎माँ का  लाड,  प्यार,  दुलार  जरूरी  है, ‎मगर गलत राह पर चलते देख फटकार भी जरूरी है। ‎ ‎माँ जैसा प्रेम शायद ही दुनिया में कोई कर पाता है, ‎जिनकी  माँं नहीं होती  उनसे  पूछो,  ‎कितनी  दर-दर  की  ठोकरें खाता है। ‎ ‎दुखी जब होते हैं बच्चे तो देती है माँ चुम्मी, ‎बच्चों के लिए प्यारी होती हैं उनकी मम्मी। ‎ ‎माँ...... माँ त्याग और समर्पण की मूर्ति है, जो खुद से पहले अपने बच्चों, अपने पति, अपने परिवार की खुशियों के बारे में सोचती है, जो सुबह सबसे पहले उठती है और रात को सब के सोने के बाद सोती है, जो स...

बचपन एक अनोखा एहसास...🌸

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  बचपन एक अनोखा एहसास...🌸 काश वह बचपन लौटकर आता, अपनी धुन में मस्त हम रहते, नाचते, कूदते, घूमते फिरते, किसी बात की परवाह न करते। न कल की फिर फिक्र सताती, रात को चैन की नींद आ जाती, सुबह उठते ही खेलने निकल जाते, सारा दिन फिर धूम मचाते। घर लौटते ही डांट जब पड़ती, थोड़ा सा हम मुँह फुलाते, थोड़ी देर में सब भूल जाते, काश वह दिन फिर लौटके आते। बचपन के वह यार हमारे, थे बहुत न्यारे न्यारे, जिनके साथ बैठके हमने, गुजारे पल बहुत प्यारे। अब वह दोस्त पता नहीं कहाँ है, उनसे न मिलना होता, होता है जो कभी कभी तो, पल भर में बचपन कहाँ याद होता। अब काल की भी फिक्र सताती, नही चैन की नींद है आती, अपनी मंज़िल पाने के लिए, दिन जगते और रात जगाती। अब जैसा भी है, जो भी है, उसी में अब रहना भाता, बचपन की तो है बात निराली, काश वह बचपन लौटकर आता। - रोहित प्रभाकर 🌺 @rohitvprabhakar

एक कविता राष्ट्र के नाम...🇮🇳

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एक कविता राष्ट्र के नाम... भारत था सोने की चिड़िया, अंग्रेजों न लूटा था। तमाम तरह के जुल्म थे ठाएं, फिर भी भारत न टूटा था। भारत का नरसंहार किया था, फूट डालकर राज किया था। जलियांवाला वार किया था, फिर भी भारत न टूटा था। चर्बी वाले कारतूस ने , एक क्रांति लाई थी। भारत के कई लोगों ने , यह जिम्मेदारी उठाई थी। हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई, सबकी भागीदारी थी। एक-एक का नाम क्या लूं , संख्या बहुत सारी थी। आज़ादी के परवानों ने , सांसे अपनी खोई थी। यूंही नहीं मिली आज़ादी साहब, न जाने कितनी माएं रोई थी। भारत जब आज़ाद हुआ तो, एक समस्या भारी थी। कई हिस्सों में राज्य बटे थे, जिनकी ज़िम्मेदारी थी। दीन धरम की बात न पूछो, न जाने कितनी जाति थी। तमाम किस्म के लोग यहां थे, न जाने कितनी संस्कृति थी। इस समस्या को निपटाने, पटेल आगे आये थे। (सरदार वल्लभ भाई पटेल) पुरुस्कार और दंड की नीति से, भारत देश बनाये थे। भारत के वीर जवानों ने, यह क्रांति लाई थी। तब जाकर सही मायने, में आज़ादी पाई थी। ऐ नमन तुझे करते है भारत, तू हमारी शान है। तुझ पे जीवन कुर्बान है, तुझ पे जीवन कुर्बान है।     - रोहित प्रभाकर संक्षेप में...

कैसें अब कहें ...❤️...

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कैसें अब कहें ...❤️ ‎तुम पसंद हो मुझे, पर कभी कह नहीं पाऊंगा। ‎क्या मैं तुम्हें पसंद हूँ, यह कैसे जान पाऊंगा। ‎ ‎तुम पसंद हो मुझे उस फूल की तरह... ‎जिसे मैं पाना तो चाहता हूँ, पर तोड़ना नहीं, ‎क्योंकि टूटते ही वह कुछ समय में बिखर जाता है , ‎इसलिए... ख़ामोश रहता हूँ।  ‎लेकिन.... ‎कभी - कभी लगता है, एक बार कहकर देखूँ , ‎फिर लगता है की ठीक नहीं....थोड़ा इंतज़ार करके देखूँ। ‎ ‎कि माना...  ‎कुछ नहीं कह पाता मैं ,मगर समझ तुम भी जाती हो, ‎क्यों देखते ही मुझे, सहमी सी हो जाती हो ।  ‎एक पल में ऐसा लगता है की....  ‎शायद तुम्हें भी कुछ कहना, पर कह नहीं पाती हो.. ‎मैं चुप रहता हूंँ इसलिए, शायद तुम भी चुप हो जाती हो। ‎ ‎इसलिए तुमसे कहने की कोशिश बार बार करता हूँ,  ‎पर मिलके क्या और कैसे बोलूं इस कश्मकश मैं रहता हूँ। ‎इस कश्मकश को अब तुम ही सुलझाओं,  ‎तुम ही हो शायद जो इसका हल निकाल पाओ। ‎ ‎लेकिन... ‎जो भी हल निकलोगी तुम, वो मुझको स्वीकार है, ‎हाँ कहो ..... या फिर ना... लेकिन तुमसे प्यार है। ‎ ‎~ रोहित प्रभाकर 🌸 @rohitvprabhakar