बचपन एक अनोखा एहसास...🌸

 



बचपन एक अनोखा एहसास...🌸

काश वह बचपन लौटकर आता,
अपनी धुन में मस्त हम रहते,
नाचते, कूदते, घूमते फिरते,
किसी बात की परवाह न करते।

न कल की फिर फिक्र सताती,
रात को चैन की नींद आ जाती,
सुबह उठते ही खेलने निकल जाते,
सारा दिन फिर धूम मचाते।

घर लौटते ही डांट जब पड़ती,
थोड़ा सा हम मुँह फुलाते,
थोड़ी देर में सब भूल जाते,
काश वह दिन फिर लौटके आते।

बचपन के वह यार हमारे,
थे बहुत न्यारे न्यारे,
जिनके साथ बैठके हमने,
गुजारे पल बहुत प्यारे।

अब वह दोस्त पता नहीं कहाँ है,
उनसे न मिलना होता,
होता है जो कभी कभी तो,
पल भर में बचपन कहाँ याद होता।

अब काल की भी फिक्र सताती,
नही चैन की नींद है आती,
अपनी मंज़िल पाने के लिए,
दिन जगते और रात जगाती।

अब जैसा भी है, जो भी है,
उसी में अब रहना भाता,
बचपन की तो है बात निराली,
काश वह बचपन लौटकर आता।


- रोहित प्रभाकर 🌺

@rohitvprabhakar


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