कैसें अब कहें ...❤️...
कैसें अब कहें ...❤️
तुम पसंद हो मुझे, पर कभी कह नहीं पाऊंगा।
क्या मैं तुम्हें पसंद हूँ, यह कैसे जान पाऊंगा।
तुम पसंद हो मुझे उस फूल की तरह...
जिसे मैं पाना तो चाहता हूँ, पर तोड़ना नहीं,
क्योंकि टूटते ही वह कुछ समय में बिखर जाता है ,
इसलिए... ख़ामोश रहता हूँ।
लेकिन....
कभी - कभी लगता है, एक बार कहकर देखूँ ,
फिर लगता है की ठीक नहीं....थोड़ा इंतज़ार करके देखूँ।
कि माना...
कुछ नहीं कह पाता मैं ,मगर समझ तुम भी जाती हो,
क्यों देखते ही मुझे, सहमी सी हो जाती हो ।
एक पल में ऐसा लगता है की....
शायद तुम्हें भी कुछ कहना, पर कह नहीं पाती हो..
मैं चुप रहता हूंँ इसलिए, शायद तुम भी चुप हो जाती हो।
इसलिए तुमसे कहने की कोशिश बार बार करता हूँ,
पर मिलके क्या और कैसे बोलूं इस कश्मकश मैं रहता हूँ।
इस कश्मकश को अब तुम ही सुलझाओं,
तुम ही हो शायद जो इसका हल निकाल पाओ।
लेकिन...
जो भी हल निकलोगी तुम, वो मुझको स्वीकार है,
हाँ कहो ..... या फिर ना... लेकिन तुमसे प्यार है।
~ रोहित प्रभाकर 🌸
@rohitvprabhakar

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