एक कविता राष्ट्र के नाम...🇮🇳
एक कविता राष्ट्र के नाम...
भारत था सोने की चिड़िया, अंग्रेजों न लूटा था।
तमाम तरह के जुल्म थे ठाएं, फिर भी भारत न टूटा था।
भारत का नरसंहार किया था, फूट डालकर राज किया था।
जलियांवाला वार किया था, फिर भी भारत न टूटा था।
चर्बी वाले कारतूस ने , एक क्रांति लाई थी।
भारत के कई लोगों ने , यह जिम्मेदारी उठाई थी।
हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई, सबकी भागीदारी थी।
एक-एक का नाम क्या लूं , संख्या बहुत सारी थी।
आज़ादी के परवानों ने , सांसे अपनी खोई थी।
यूंही नहीं मिली आज़ादी साहब, न जाने कितनी माएं रोई थी।
भारत जब आज़ाद हुआ तो, एक समस्या भारी थी।
कई हिस्सों में राज्य बटे थे, जिनकी ज़िम्मेदारी थी।
दीन धरम की बात न पूछो, न जाने कितनी जाति थी।
तमाम किस्म के लोग यहां थे, न जाने कितनी संस्कृति थी।
इस समस्या को निपटाने, पटेल आगे आये थे।
(सरदार वल्लभ भाई पटेल)
पुरुस्कार और दंड की नीति से, भारत देश बनाये थे।
भारत के वीर जवानों ने, यह क्रांति लाई थी।
तब जाकर सही मायने, में आज़ादी पाई थी।
ऐ नमन तुझे करते है भारत, तू हमारी शान है।
तुझ पे जीवन कुर्बान है, तुझ पे जीवन कुर्बान है।
- रोहित प्रभाकर
संक्षेप में जानिए भारत आज़ाद कैसे हुआ :-
(बात उस समय की जब 17 वी सदी में अंग्रेजों का भारत में आगमन होता है और उनका भारत पर एकाधिकार व राज स्थापित होता है, फिर तमाम कानून जो ब्रिटिश हित से प्रेरित थे उनके द्वारा लाए गए व भारत का औपनिवेशीकरण किया गया, इनके खिलाफ़ भारत में 1857 की क्रांति व कही आंदोलन हुए और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ, लेकिन आज़ादी के बाद भी भारत कई हिस्सों में बटा हुआ था, तब भारत के महान नेता सरदार पटेल के द्वार अपनाई नीति के तहत भारत का एकीकरण हुआ व 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत को विश्व का सबसे बड़ा संविधान मिला।)
‘जियें तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे, यह हर्ष।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष।'
जय हिंद, जय भारत।
@rohitvprabhakar
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